बाजार में हाहाकार: ट्रेड-टैरिफ तनाव बढ़ते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, निवेशकों के करोड़ों डूबे

वैश्विक स्तर पर बढ़ते ट्रेड और टैरिफ तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला, जहां एक ही कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों से नकारात्मक संकेत मिले, घरेलू निवेशकों में भी घबराहट फैल गई और भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार से ही लाल निशान में फिसलता गया, वहीं निफ्टी भी अहम सपोर्ट लेवल टूटने के बाद कमजोर होता चला गया। इस गिरावट के चलते कुछ ही घंटों में निवेशकों के लाखों-करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आयात-निर्यात शुल्क को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। ट्रेड-टैरिफ टेंशन से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर ऑटो, मेटल, आईटी और फार्मा जैसे सेक्टर्स पर साफ दिखाई दिया। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भी दबाव देखने को मिला, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने जोखिम कम करने के लिए लगातार बिकवाली की।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट और भी तेज रही, जिससे छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कई शेयरों में लोअर सर्किट तक लग गया, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया। जानकारों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं और सोना तथा बॉन्ड जैसे एसेट्स में निवेश बढ़ा है।
हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि यह गिरावट पूरी तरह स्थायी नहीं है और आने वाले समय में यदि वैश्विक स्तर पर ट्रेड-टैरिफ विवाद में नरमी आती है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में फैसले न लें, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही फोकस करें। कुल मिलाकर, ट्रेड-टैरिफ टेंशन ने बाजार को झकझोर कर रख दिया है और निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है।



