सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट्स पर बढ़ेगा टैक्स? सरकार के नए कानून से बड़े बदलाव

केंद्र सरकार ने सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नियंत्रण बढ़ाने के उद्देश्य से दो नए कानूनों का मसौदा पेश किया है, जिसके बाद देश में तंबाकू उत्पाद महंगे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सरकार का तर्क है कि बढ़ते स्वास्थ्य खतरों, युवाओं में तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति और आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कठोर कदम उठाना अब जरूरी हो गया है। नए कानूनों के तहत तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और सेस में वृद्धि करने का प्रस्ताव शामिल है, जिससे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, वेपिंग प्रोडक्ट्स और निकोटिन पाउच सभी की कीमतें बढ़ सकती हैं। बजट से पहले पेश किए गए इन प्रस्तावों ने उद्योग जगत और उपभोक्ताओं दोनों में हलचल पैदा कर दी है। सरकार का कहना है कि टैक्स बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि खतरनाक आदतों पर रोक लगाना है। भारत दुनिया में सबसे अधिक तंबाकू उपभोक्ता देशों में से एक है, जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी खर्च हर साल लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब कीमतें बढ़ती हैं, तो खासकर युवा और निम्न-आय वर्ग के उपभोक्ताओं में तंबाकू के सेवन में कमी आती है। नए कानून में पैकेजिंग नियमों को सख्त करने, विज्ञापन प्रतिबंधों को और कड़ा करने तथा अवैध तंबाकू कारोबार पर निगरानी बढ़ाने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा सरकार ई-सिगरेट और निकोटिन डिलीवरी सिस्टम पर भी नई गाइडलाइन लाने की तैयारी में है, ताकि इन उत्पादों के प्रवेश को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि तंबाकू उद्योग से जुड़े लोगों ने आशंका जताई है कि अत्यधिक टैक्स से अवैध व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे सरकार का राजस्व घट सकता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू के सेवन में कमी से लंबे समय में देश को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा लाभ होगा। फिलहाल प्रस्तावों पर विचार चल रहा है और अंतिम निर्णय बजट सत्र में लिया जा सकता है। यदि यह कानून लागू हो जाते हैं, तो आम जनता को आने वाले समय में तंबाकू उत्पाद काफी महंगे मिल सकते हैं और व्यापक रूप से इसके सेवन में कमी देखी जा सकती है।



