जब सचिन तेंदुलकर ने खुद को बताया था ‘एक्टर’, ₹58 लाख का टैक्स बचाया – जानिए पूरा मामला

भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर न सिर्फ मैदान पर बल्कि वित्तीय समझ में भी माहिर साबित हुए हैं। एक समय ऐसा आया जब सचिन ने खुद को “एक्टर” (Actor) बताते हुए करीब ₹58 लाख का टैक्स बचाया था। यह मामला आयकर विभाग और सचिन तेंदुलकर के बीच विवाद का विषय भी बना था, लेकिन आखिरकार तेंदुलकर के पक्ष में फैसला आया।
दरअसल, यह मामला उन दिनों का है जब सचिन ने कई बड़े ब्रांड्स के लिए विज्ञापन किए थे — जिनमें पेप्सी, एमआरएफ, और एडिडास जैसे नाम शामिल हैं। इन विज्ञापनों से होने वाली आय को लेकर आयकर विभाग का कहना था कि यह “व्यावसायिक आय” (Business Income) है, जबकि सचिन ने इसे “कलात्मक प्रदर्शन” यानी ‘प्रोफेशनल आर्टिस्ट’ की इनकम बताया। उन्होंने तर्क दिया कि विज्ञापनों में वे एक कलाकार की तरह प्रदर्शन करते हैं — कैमरे के सामने अभिनय करते हैं, संवाद बोलते हैं और स्क्रिप्ट के अनुसार भावनाएं व्यक्त करते हैं।
सचिन के अनुसार, इस आधार पर उन्हें Section 80RR के तहत टैक्स छूट मिलनी चाहिए, जो कि उन लोगों के लिए लागू होती है जो विदेशों में अपनी कलात्मक सेवाओं के बदले आय अर्जित करते हैं। इस तर्क को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने भी सही ठहराया। अदालत ने माना कि विज्ञापन या टीवी कमर्शियल में सचिन का योगदान सिर्फ एक ब्रांड एम्बेसडर का नहीं, बल्कि एक परफॉर्मर का भी है।
इस फैसले के बाद सचिन को करीब ₹58 लाख की टैक्स छूट मिली। यह मामला उस समय चर्चा में रहा क्योंकि इसने यह साबित किया कि एक क्रिकेटर केवल खेल में ही नहीं, बल्कि कानूनी और वित्तीय रणनीतियों में भी समझदार हो सकता है।
सचिन तेंदुलकर की यह चाल न केवल समझदारी का प्रतीक थी, बल्कि इसने कई अन्य खिलाड़ियों और कलाकारों के लिए भी रास्ता खोला कि वे अपने पेशेवर अनुबंधों को किस तरह टैक्स फ्रेंडली बना सकते हैं। यह घटना दिखाती है कि “मास्टर ब्लास्टर” मैदान से बाहर भी एक ‘स्मार्ट फाइनेंशियल प्लेयर’ हैं।



