
देश के सबसे बड़े फूड नेटवर्क से जुड़े कथित 70 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हुआ, जिसने 60 टेराबाइट से अधिक बिलिंग डेटा और 1.7 लाख रेस्टोरेंट्स के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड का विश्लेषण कर चौंकाने वाली अनियमितताओं को उजागर किया। जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला एक बड़ी बिरयानी चेन से जुड़ा है, जो कई राज्यों में फ्रेंचाइज़ मॉडल पर काम कर रही थी। AI सिस्टम को खास तौर पर इस उद्देश्य से डिजाइन किया गया था कि वह असामान्य पैटर्न, फर्जी बिलिंग, टैक्स चोरी और सप्लाई चेन में हेरफेर जैसी गतिविधियों की पहचान कर सके। जब पूरे देश के अलग-अलग शहरों से आए डिजिटल बिल, जीएसटी फाइलिंग, ऑनलाइन ऑर्डर और पेमेंट गेटवे के आंकड़ों को एकीकृत किया गया, तब एल्गोरिद्म ने पाया कि हजारों रेस्टोरेंट्स में बिक्री के आंकड़े वास्तविक उपभोग से मेल नहीं खा रहे थे। कई स्थानों पर एक ही समय में असंभव स्तर की बिक्री दिखाई गई, जबकि कच्चे माल की खरीद उससे काफी कम दर्ज थी। AI ने मशीन लर्निंग मॉडल के जरिए पिछले तीन वर्षों के ट्रेंड का अध्ययन किया और यह पहचाना कि कुछ विशेष शाखाओं में अचानक राजस्व में असामान्य उछाल आया, जो त्योहारों या प्रमोशनल ऑफर से भी न्यायसंगत नहीं था। इसके अलावा, हजारों फर्जी ग्राहक आईडी और संदिग्ध डिजिटल वॉलेट ट्रांजैक्शन भी सामने आए, जिनके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई जा रही है। सिस्टम ने टैक्स डेटा, बैंकिंग रिकॉर्ड और सप्लाई चेन इनवॉइस को क्रॉस-वेरीफाई कर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को चिह्नित किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि यह विश्लेषण पारंपरिक तरीके से किया जाता तो इसमें वर्षों लग जाते, लेकिन AI ने कुछ ही हफ्तों में लाखों एंट्री स्कैन कर रिपोर्ट तैयार कर दी। इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल इकोनॉमी के दौर में बड़े पैमाने पर होने वाले आर्थिक अपराधों को पकड़ने के लिए तकनीक कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। अब संबंधित एजेंसियां फॉरेंसिक ऑडिट और कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटी हैं, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में टैक्स मॉनिटरिंग, कॉरपोरेट ऑडिट और बैंकिंग सिस्टम में AI की भूमिका और भी बढ़ेगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।



