लोकतंत्र के मंदिर पर हमला: संसद सुरक्षा में बलिदान देने वाले वीरों को CM योगी की श्रद्धांजलि

भारत के लोकतंत्र के मंदिर, संसद भवन पर आज ही के दिन वर्ष 2001 में हुआ कायराना आतंकी हमला राष्ट्र की स्वायत्तता, स्वाभिमान और लोकशक्ति पर किया गया नृशंस आघात था। यह हमला केवल एक इमारत पर नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान और जनभावनाओं पर सीधा प्रहार था। देश उस दिन स्तब्ध रह गया, लेकिन उसी क्षण भारत की सुरक्षा व्यवस्था और वीरता की अद्भुत मिसाल भी सामने आई।
13 दिसंबर 2001 को आतंकियों ने संसद परिसर में घुसकर लोकतंत्र को कलंकित करने की कोशिश की। उस समय संसद सत्र चल रहा था और देश के निर्वाचित प्रतिनिधि वहां मौजूद थे। यदि आतंकियों की साजिश सफल हो जाती, तो इसके परिणाम देश और लोकतंत्र दोनों के लिए अकल्पनीय होते। लेकिन भारत के जांबाज सुरक्षाकर्मियों ने अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए आतंकियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया।
इस हृदय विदारक घटना में अपने प्राणों की आहुति देकर संसद की गरिमा और राष्ट्र की रक्षा करने वाले अमर वीरों का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए हमारे सुरक्षाबल हर परिस्थिति में तैयार हैं। उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भावुक शब्दों में शहीदों को नमन करते हुए कहा कि संसद पर हुआ आतंकी हमला भारत की एकता, अखंडता और लोकतंत्र को तोड़ने की साजिश था, जिसे हमारे वीर जवानों ने अपने बलिदान से विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उन अमर शहीदों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा, जिन्होंने देश की आन-बान-शान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
संसद हमला हमें यह भी याद दिलाता है कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसके खिलाफ एकजुट होकर खड़े रहना समय की आवश्यकता है। आज, जब हम उन वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो यह संकल्प भी लेते हैं कि उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे और देश की सुरक्षा, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सदैव सजग रहेंगे।
अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन।



