
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के क्लासमेट और मीरा रोड निवासी 81 वर्षीय असगर अली वोहरा ने लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप करने और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है।
असगर अली वोहरा का दावा है कि उन्होंने वर्ष 1989 में जमीन खरीदी थी। उनके आरोप के मुताबिक, बाद में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया और उस पर कब्जे की कोशिश की गई। यह विवाद कई वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, वोहरा ने इस मामले में करीब 11 वर्ष पहले एफआईआर भी दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी उन्हें मामले में अपेक्षित न्याय नहीं मिल पाया है। इसी वजह से उन्होंने अब प्रधानमंत्री के सामने अपनी शिकायत रखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, असगर अली वोहरा को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात का अवसर शिवसेना नेता प्रताप सरनाइक की मदद से मिला। मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी जमीन से जुड़े विवाद और अब तक हुई कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी तथा मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने का अनुरोध किया।
इस जमीन विवाद में कथित फर्जी दस्तावेज और जमीन पर अवैध कब्जे जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से किए गए हैं और मामले की अंतिम सच्चाई जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल CBI जांच की मांग सामने रखी गई है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि CBI ने जांच अपने हाथ में ले ली है।
इस मुलाकात की एक खास वजह प्रधानमंत्री मोदी और असगर अली वोहरा का पुराना परिचय भी है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों बचपन में एक ही स्कूल में पढ़े थे। वोहरा ने इसी पुराने संबंध के आधार पर प्रधानमंत्री तक अपनी शिकायत पहुंचाई और उम्मीद जताई कि उनके मामले पर उचित स्तर पर ध्यान दिया जाएगा।
बताया गया है कि विवादित जमीन मीरा रोड क्षेत्र में स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब 2,810 वर्ग मीटर बताया गया है। इतने लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण शिकायतकर्ता अब मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है। CBI जांच की मांग पर आगे क्या निर्णय होता है और जमीन के स्वामित्व व कथित दस्तावेजों को लेकर जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।



