फिलिंग के बाद फिर कैविटी क्यों होती है? जानें कारण

दांत में कैविटी होने पर खराब हिस्से को साफ करके उस जगह फिलिंग कर दी जाती है। इससे दांत में बने छेद को बंद करने और उसकी संरचना को बचाने में मदद मिलती है। लेकिन फिलिंग हो जाने का मतलब यह नहीं है कि उस दांत में भविष्य में दोबारा सड़न नहीं हो सकती। फिलिंग के आसपास फिर से कैविटी बनने की स्थिति को Secondary Caries या Recurrent Caries कहा जाता है।
फिलिंग के आसपास प्लाक जमा होना: मुंह में मौजूद बैक्टीरिया और भोजन के अवशेष मिलकर प्लाक बनाते हैं। अगर प्लाक को नियमित रूप से साफ नहीं किया जाए तो बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं, जो दांतों की सतह को नुकसान पहुंचा सकता है। यही प्रक्रिया फिलिंग के आसपास मौजूद दांत के हिस्से को भी प्रभावित कर सकती है।
पुरानी फिलिंग में बदलाव: डेंटल फिलिंग हमेशा के लिए नहीं चलती। समय के साथ कुछ फिलिंग घिस सकती हैं, टूट सकती हैं या उनके किनारों पर ऐसी जगह बन सकती है जहां प्लाक जमा होना आसान हो जाए। इससे फिलिंग के आसपास दोबारा सड़न का खतरा बढ़ सकता है।
मीठा और बार-बार खाना भी कारण: जब दांत बार-बार चीनी और स्टार्च वाले खाद्य पदार्थों के संपर्क में आते हैं तो मुंह के बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं। बार-बार मीठा खाना या लंबे समय तक मीठे पेय की चुस्कियां लेना दांतों को लगातार एसिड के संपर्क में रख सकता है, जिससे कैविटी का जोखिम बढ़ता है।
ब्रशिंग में लापरवाही: सिर्फ फिलिंग करवाने के बाद दांतों की सफाई पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। रोजाना फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करना और दांतों के बीच की सफाई करना जरूरी है। जहां तक पहुंचना मुश्किल होता है, वहां प्लाक जमा होने की संभावना अधिक हो सकती है।
मुंह का सूखापन भी बढ़ा सकता है जोखिम: लार दांतों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिन लोगों का मुंह अक्सर सूखता रहता है, उनमें कैविटी का खतरा बढ़ सकता है। कुछ अन्य स्थितियां और दवाएं भी मुंह के सूखेपन से जुड़ी हो सकती हैं।
इसलिए अगर फिलिंग वाले दांत में दोबारा दर्द, ठंडा-गर्म लगना, संवेदनशीलता, खाना फंसना या दांत की सतह में बदलाव महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दंत चिकित्सक जरूरत पड़ने पर जांच और एक्स-रे के जरिए यह पता लगा सकते हैं कि फिलिंग के आसपास दोबारा सड़न तो नहीं हो रही है।
कुल मिलाकर, फिलिंग कैविटी का इलाज करती है, लेकिन भविष्य में नई या दोबारा होने वाली सड़न से पूरी सुरक्षा नहीं देती। सही ब्रशिंग, दांतों के बीच सफाई, मीठे खाद्य पदार्थों की मात्रा और आवृत्ति कम रखना तथा नियमित डेंटल चेकअप दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।



