
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शांति और सहयोग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और भारत-चीन जैसे बड़े देशों के बीच दीर्घकालिक तथा रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनका यह संदेश ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
BRICS सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। करीब 50 मिनट चली इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा की। शी जिनपिंग ने दीर्घकालिक संबंधों और सहयोग पर जोर दिया, जबकि दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संपर्क बढ़ाने से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे।
बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत की। अक्टूबर 2024 में हुए समझौते के बाद दोनों पक्षों की सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया भी हुई।
भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के बावजूद कई महत्वपूर्ण चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, निवेश और रणनीतिक सुरक्षा जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए संवेदनशील हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग वार्ता को संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक सावधानी भरा कदम माना जा रहा है, न कि सभी विवादों के समाधान के रूप में।
BRICS मंच पर शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भी शांति की अपील की। उन्होंने BRICS देशों से मध्यस्थता और शांतिपूर्ण समाधान में भूमिका निभाने का आह्वान किया। चीन का कहना है कि क्षेत्र में जारी युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में नहीं है और संवाद के जरिए तनाव कम करने की जरूरत है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को किसी देश के खिलाफ खड़े होने वाला मंच बनाने के बजाय सहयोग और साझेदारी का मंच बताया। उन्होंने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
भारत-चीन संबंधों के लिहाज से आर्थिक सहयोग भी अहम मुद्दा है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां बनी हुई हैं और हाल के समय में उड़ानों तथा कारोबारी वीजा प्रक्रियाओं में भी सुधार हुआ है। हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत अभी भी सतर्क रुख अपनाता है।
कुल मिलाकर, BRICS Summit 2026 में मोदी-जिनपिंग मुलाकात को भारत और चीन के रिश्तों में संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। शांति, सहयोग और मतभेदों को बातचीत के जरिए संभालने का संदेश जरूर सामने आया है, लेकिन सीमा और रणनीतिक मुद्दों पर आगे की प्रगति दोनों देशों के बीच होने वाली निरंतर बातचीत पर निर्भर करेगी।



