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पीएफआई ने रची थी राममंदिर निर्माण रोकने और फिर से बाबरी मस्जिद निर्माण की साजिश

  • एनआईए ने पीएफआई सदस्यों से बरामद सीडी की फोरेंसिक रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी

मुंबई। पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) राम मंदिर निर्माण कार्य में बाधा डालने और फिर से बाबरी मस्जिद निर्माण की साजिश रच रहा था। यह साजिश एक व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से रची गई थी और उस व्हाट्सएप का एडमिन पाकिस्तान का निवासी है। इस बात का खुलासा नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की पीएफआई के पास से बरामद एक सीडी की छानबीन से हुआ है।

जानकारी के अनुसार एनआईए की छानबीन में यह भी पता चला है कि पीएफआई ने 2047 तक भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की साजिश रची थी। इस मामले में आरोपितों ने पीएफआई के नए सदस्यों को हथियार चलाने की और उनका माइंडवाश करने की ट्रेनिंग दिए जाने की भी जानकारी भी सामने आई है। इस तरह की जानकारी इससे संबंधित बरामद एक सीडी की फोरेंसिंक जांच रिपोर्ट एनआईए के वकील अजय मिसर ने नासिक सेशन कोर्ट में सौंपी है।

सोमवार को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद इन सभी को फिर से कोर्ट में पेश किया गया था और कोर्ट ने सभी आरोपितों को चार दिन के लिए एनआईए रिमांड में दे दिया। इसी मामले में सोमवार को सरकारी वकील ने जांच में आई जानकारियों को कोर्ट के समक्ष रखा था और मंगलवार को बरामद सीडी की फोरेंसिक रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश कर दी है। इस मामले की गहन छानबीन जारी है।

उल्लेखनीय है कि एनआईए ने 22 सितंबर को पूरे देश में एकसाथ पीएफआई के ठिकानों पर छापा मारकर नासिक, मालेगांव और आसपास के इलाकों से पांच पीएफआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इनमें नासिक व आसपास से मौलाना सैफुररहमान सईद, अहमद अंसारी, अब्दुल कयुम बादुल्ला शेख, रजी अहमद खान, वसीम अजीम उर्फ मुन्ना शेख और नसीसाब मुल्ला शामिल हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने पीएफआई और उससे संबंधित संस्थाओं पर प्रतिबंधित लगा दिया था।

इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश नेता प्रवीण दरेकर ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि इस तरह की संस्थाएं देश सेवा के नाम पर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। इन सभी संस्थाओं को ढ़ूंढकर उन पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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