KGMU सर्वे: तंबाकू छुड़ाने वाले डॉक्टरों में भी लत का खुलासा

लखनऊ के KGMU से सामने आई तंबाकू सेवन से जुड़ी जानकारी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। जिन स्वास्थ्यकर्मियों से मरीजों को तंबाकू छोड़ने के लिए जागरूक करने की उम्मीद की जाती है, उनके बीच भी तंबाकू सेवन का मुद्दा शोध का विषय बना हुआ है।
KGMU के शोध रिकॉर्ड में स्वास्थ्य पेशेवर छात्रों में तंबाकू इस्तेमाल के पैटर्न पर अध्ययन दर्ज है। इससे पता चलता है कि मेडिकल और डेंटल क्षेत्र से जुड़े युवाओं में भी तंबाकू की आदत को लेकर समय-समय पर अध्ययन किए गए हैं।
तंबाकू की लत केवल धूम्रपान तक सीमित नहीं है। सिगरेट और बीड़ी के अलावा गुटखा, खैनी और दूसरे smokeless tobacco products भी निकोटीन की निर्भरता पैदा कर सकते हैं। KGMU के शोधकर्ताओं ने लखनऊ में smokeless tobacco के इस्तेमाल के रुझानों पर भी अध्ययन किया है।
मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े लोगों के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में सलाह देते हैं। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की अपनी तंबाकू आदतें रोकथाम और काउंसलिंग के प्रयासों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
KGMU में तंबाकू छोड़ने के लिए बाकायदा Tobacco Cessation Clinic संचालित है। यहां तंबाकू छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाती है।
KGMU के शोध में तंबाकू छोड़ने की इच्छा और निकोटीन निर्भरता जैसे पहलुओं का भी अध्ययन किया गया है। ऐसे अध्ययन यह समझने में मदद करते हैं कि तंबाकू उपयोग करने वाले लोगों को छोड़ने के लिए किस तरह की सहायता की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों के लिए चुनौती सिर्फ मरीजों को तंबाकू से दूर करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के बीच भी तंबाकू नियंत्रण को मजबूत करना है। डॉक्टर और मेडिकल छात्र खुद तंबाकू मुक्त जीवन अपनाएं तो जागरूकता अभियानों का असर और प्रभावी हो सकता है।
कुल मिलाकर, KGMU से जुड़ी रिसर्च तंबाकू नियंत्रण की चुनौती की गंभीरता को सामने लाती है। संस्थान में तंबाकू मुक्ति क्लिनिक और इस विषय पर लगातार शोध यह दिखाता है कि तंबाकू की लत से निपटने के लिए मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच भी जागरूकता और सहायता जरूरी है।



