RERA Rules: बिल्डर ने पजेशन रोका तो ऐसे मिलेगा ब्याज समेत रिफंड

घर खरीदने के बाद अगर बिल्डर तय तारीख पर पजेशन नहीं देता है, तो खरीदार को अनिश्चितकाल तक इंतजार करना जरूरी नहीं है। Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 यानी RERA के तहत होमबायर्स को ऐसे मामलों में कई अधिकार दिए गए हैं।
RERA की धारा 18 देरी से पजेशन मिलने की स्थिति में खरीदारों के लिए अहम प्रावधान है। अगर प्रमोटर एग्रीमेंट में तय समय के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा करके पजेशन देने में विफल रहता है, तो खरीदार परिस्थितियों के अनुसार प्रोजेक्ट से बाहर निकलकर रिफंड और लागू ब्याज की मांग कर सकता है।
वहीं अगर खरीदार फ्लैट छोड़ना नहीं चाहता और प्रोजेक्ट में बना रहता है, तो देरी की अवधि के लिए ब्याज या मुआवजे का दावा किया जा सकता है। यानी सिर्फ पजेशन मिलने का इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। हालांकि वास्तविक राहत मामले के तथ्यों, एग्रीमेंट और संबंधित राज्य के RERA नियमों पर निर्भर कर सकती है।
हाल के मामलों से भी पता चलता है कि RERA अथॉरिटी देरी से परेशान खरीदारों को राहत दे रही हैं। एक मामले में तेलंगाना RERA ने तीन साल तक पजेशन नहीं मिलने पर खरीदार को करीब ₹14.17 लाख की रकम के साथ ₹6.4 लाख ब्याज देने का आदेश दिया।
इसी तरह महाराष्ट्र में एक लंबे समय से लंबित हाउसिंग प्रोजेक्ट के दो खरीदारों को भी MahaRERA ने भुगतान की गई रकम ब्याज समेत लौटाने का निर्देश दिया। ऐसे फैसले बताते हैं कि पजेशन में गंभीर और लंबी देरी होने पर खरीदार नियामकीय मंच का सहारा ले सकता है।
RERA में शिकायत करने से पहले खरीदार को अपने सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। इनमें Builder-Buyer Agreement, Allotment Letter, Payment Receipts, बैंक स्टेटमेंट, पजेशन की तय तारीख और बिल्डर के साथ हुई लिखित बातचीत शामिल हैं। भुगतान का स्पष्ट रिकॉर्ड शिकायत को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
अगर बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर रहा है, RERA रजिस्ट्रेशन की स्थिति खराब हो गई है या निर्माण लंबे समय से रुका हुआ है, तो खरीदार संबंधित राज्य की RERA अथॉरिटी में शिकायत कर सकता है। हाल के एक हरियाणा RERA मामले में भी प्रोजेक्ट की प्रगति रुकने और डेवलपर का रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बाद खरीदार को भुगतान की रकम पर 10.80% वार्षिक ब्याज के साथ रिफंड का आदेश दिया गया।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर देरी वाले मामले में अपने-आप पूरा पैसा या एक निश्चित ब्याज दर मिलना तय नहीं होता। राहत प्रोजेक्ट की स्थिति, एग्रीमेंट, देरी के कारण, लागू राज्य RERA नियमों और अथॉरिटी के आदेश पर निर्भर करती है। इसलिए बड़ा वित्तीय या कानूनी फैसला लेने से पहले संबंधित RERA अथॉरिटी या योग्य कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।



