WPI Inflation: अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 9.92% हुई

भारत में थोक महंगाई को लेकर अगस्त महीने के आंकड़े सामने आ गए हैं। अगस्त 2026 में WPI आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत थी। यानी एक महीने में थोक महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में ऑल कमोडिटीज WPI इंडेक्स 110.8 रहा, जबकि जुलाई में यह 110.0 था। लगातार ऊंची थोक महंगाई से अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में लागत का दबाव बने रहने के संकेत मिल रहे हैं।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। अगस्त में WPI Food Index की महंगाई दर बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 6.65 प्रतिशत थी। खाने-पीने से जुड़ी कीमतों में यह बढ़ोतरी महंगाई के दबाव को और बढ़ाने वाली रही।
ईंधन और बिजली की कीमतें अगस्त में महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रहीं। इस श्रेणी की महंगाई दर जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस से जुड़ी कीमतों में सालाना आधार पर अगस्त में 34.41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह वृद्धि 26.99 प्रतिशत थी। ऊर्जा लागत बढ़ने का असर परिवहन और उत्पादन जैसी गतिविधियों की लागत पर भी पड़ सकता है।
विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। अगस्त में इस क्षेत्र की WPI महंगाई दर 8.37 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 8.29 प्रतिशत थी। खाद्य उत्पादों, बेसिक मेटल्स, रसायनों और अन्य विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में बदलाव का असर इस आंकड़े पर पड़ा।
थोक महंगाई में तेजी का असर तुरंत खुदरा बाजार की महंगाई के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि WPI और Consumer Price Index यानी CPI अलग-अलग स्तर की कीमतों को मापते हैं। हालांकि लंबे समय तक उत्पादन और थोक लागत बढ़ने पर इसका असर कारोबार, कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
अगस्त का 9.92 प्रतिशत WPI आंकड़ा महंगाई के लगातार बने दबाव की ओर इशारा करता है। खास तौर पर ईंधन, खाद्य पदार्थ और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले महीनों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू खाद्य आपूर्ति का रुख महंगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



