गणेश चतुर्थी व्रत कथा 2026: पढ़ें पौराणिक कथा और महत्व

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू पर्वों में से एक है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। इस दिन गणपति स्थापना, पूजा, आरती और व्रत कथा का पाठ करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी की पूजा में व्रत कथा सुनना या पढ़ना विशेष महत्व रखता है। कथा के माध्यम से भगवान गणेश की महिमा और उनके विघ्नहर्ता स्वरूप का स्मरण किया जाता है। भक्त श्रद्धा के साथ कथा का पाठ करके गणपति से सुख-शांति और मंगल की कामना करते हैं।
गणेश पुराण में भगवान गणेश से संबंधित अनेक कथाओं और उनकी महिमा का वर्णन मिलता है। गणेश चतुर्थी की व्रत कथा में भगवान गणेश के जन्म, उनके दिव्य स्वरूप और उनकी शक्तियों से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया जाता है।
एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवता किसी संकट को लेकर भगवान शिव के पास पहुंचे। समस्या के समाधान के लिए गणेश और कार्तिकेय की योग्यता परखने का प्रसंग आया। दोनों के सामने पृथ्वी की परिक्रमा करने की शर्त रखी गई।
कथा के अनुसार कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए, जबकि गणेश जी ने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा की। उन्होंने माता-पिता को ही संपूर्ण संसार के समान बताया। उनके इस उत्तर से शिव-पार्वती प्रसन्न हुए।
धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। गणेश चतुर्थी पर भक्त गणपति का ध्यान करते हुए अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और शुभता की कामना करते हैं।
व्रत कथा के पाठ के बाद भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, मोदक और अन्य नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद आरती कर परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है। पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
गणेश चतुर्थी व्रत कथा के पाठ से सौभाग्य, मनोकामना पूर्ति और संकटों से मुक्ति मिलने की बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। पर्व का मुख्य भाव भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मकता से जुड़ा है।



