
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात 11 सितंबर 2026 को BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित है। बैठक में रक्षा सहयोग के तहत Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, भारत में नए रूसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र, द्विपक्षीय व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंधों से पैदा हुई चुनौतियों समेत कई रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
Su-57 फाइटर जेट पर होगी अहम चर्चा
बैठक के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में रूस का Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट शामिल हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक रूस ने भारत के साथ सिर्फ विमान बिक्री ही नहीं, बल्कि तकनीकी सहयोग और संभावित संयुक्त उत्पादन जैसे विकल्पों में भी रुचि दिखाई है।
भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की जरूरत को देखते हुए यह बातचीत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत में नए न्यूक्लियर पावर प्लांट
रक्षा के बाद परमाणु ऊर्जा सहयोग भी बैठक के एजेंडे में प्रमुख स्थान रख सकता है। भारत और रूस पहले से ही असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं और अब नए परमाणु बिजली संयंत्रों तथा सहयोग के विस्तार पर चर्चा की संभावना है।
भारत के बढ़ते ऊर्जा需求 के बीच परमाणु ऊर्जा को दीर्घकालिक स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का मुद्दा भी अहम
रूस के साथ व्यापार करते समय भारत के सामने अमेरिकी प्रतिबंधों और उनसे जुड़े वित्तीय दबाव की चुनौती बनी हुई है। इसलिए मोदी-पुतिन वार्ता में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि दोनों देश प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार और भुगतान व्यवस्था को किस तरह सुचारु बनाए रखें।
रुपये-रूबल में व्यापार को बढ़ावा
भारत और रूस पिछले कुछ समय से डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालिया जानकारी के अनुसार दोनों देशों ने रुपये-रूबल आधारित भुगतान व्यवस्था को काफी मजबूत किया है और द्विपक्षीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी तंत्र के जरिए निपटाया जा रहा है।
इसलिए मोदी-पुतिन बैठक में वित्तीय सहयोग और भुगतान व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर भी चर्चा संभव है।
भारत-रूस व्यापार बढ़ाना भी लक्ष्य
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी बैठक का अहम हिस्सा रहेंगे। भारत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का आयात करता है, जबकि दोनों देश व्यापार में असंतुलन को कम करने तथा भारतीय निर्यात बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं।
यूक्रेन युद्ध पर भी हो सकती है बातचीत
द्विपक्षीय एजेंडे के अलावा यूक्रेन युद्ध और मौजूदा शांति प्रयासों पर भी मोदी और पुतिन के बीच बातचीत की संभावना है। हाल में अमेरिका के विशेष दूतों ने मॉस्को में पुतिन से मुलाकात कर युद्ध खत्म करने की दिशा में चर्चा की है। ऐसे में भारत की शांति और कूटनीतिक पहल भी बातचीत का हिस्सा बन सकती है।
पहले भी कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा कर चुके हैं
31 अगस्त को बिश्केक में SCO सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी।
BRICS के दौरान होगी अहम मुलाकात
पुतिन भारत में BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आ रहे हैं। क्रेमलिन ने उनके भारत दौरे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की पुष्टि की है। ऐसे में यह बैठक भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ वैश्विक भू-राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी।
मोदी-पुतिन की आगामी बैठक सिर्फ पारंपरिक भारत-रूस दोस्ती तक सीमित नहीं रहने वाली है। Su-57 फाइटर जेट, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, रुपये-रूबल भुगतान व्यवस्था, अमेरिकी प्रतिबंध और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे दोनों नेताओं की बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं। खासतौर पर रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में होने वाली प्रगति का असर आने वाले वर्षों में भारत की रणनीतिक और आर्थिक नीति पर पड़ सकता है।



