UP Outsourced Employees: आउटसोर्स कर्मियों को 78 दिन की पेड लीव, EPF-ESI से पेंशन तक मिलेंगे ये फायदे

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स के जरिए सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) के तहत कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और सेवा लाभ देने की व्यवस्था की गई है। अस्वस्थता या असाध्य बीमारी की स्थिति में पात्र कर्मचारियों को औसत पारिश्रमिक के 70 प्रतिशत के आधार पर 78 दिनों तक सवैतनिक अवकाश मिल सकेगा। इसके साथ ही ESI के तहत इलाज, महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश और EPF के जरिए पेंशन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
3.5 लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मियों को फायदा
नई व्यवस्था का लाभ प्रदेश के 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार इसका असर कर्मचारियों के परिवारों को जोड़कर करीब 17 से 20 लाख लोगों तक पहुंच सकता है।
बीमारी पर 78 दिन की सवैतनिक छुट्टी
नई व्यवस्था में बीमारी के दौरान कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। अस्वस्थता या कुछ गंभीर बीमारियों की स्थिति में ESI के तहत 78 दिनों तक सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा। इस दौरान भुगतान औसत पारिश्रमिक के 70 प्रतिशत के आधार पर होगा।
महिला कर्मचारियों को 180 दिन का मातृत्व अवकाश
महिला आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण सुविधा दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार दो बच्चों के जन्म तक 26 सप्ताह यानी 180 दिनों का सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिलेगा। यह भुगतान शत-प्रतिशत औसत पारिश्रमिक के आधार पर किए जाने की व्यवस्था बताई गई है।
परिवार को भी मिलेगा इलाज का लाभ
ESI व्यवस्था के तहत कर्मचारी के आश्रित परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। ESI अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और सूचीबद्ध निजी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में इलाज, सर्जरी और आवश्यक जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
EPF के जरिए पेंशन का भी प्रावधान
आउटसोर्स कर्मियों के लिए EPF के साथ पेंशन का रास्ता भी खुला है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को EPF के जरिए पेंशन का लाभ मिल सकता है। पेंशन की राशि न्यूनतम 1,000 रुपये से अधिकतम 7,500 रुपये तक होने की जानकारी दी गई है।
कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को 15 हजार रुपये
नई व्यवस्था में कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए परिवार को 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान बताया गया है। इससे आकस्मिक स्थिति में परिवार को तत्काल सहायता मिल सकेगी।
1 से 5 तारीख के बीच सीधे खाते में वेतन
आउटसोर्स कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्याओं में वेतन भुगतान में देरी भी रही है। नई व्यवस्था में पारिश्रमिक हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है। एजेंसी कर्मचारी के पारिश्रमिक से सर्विस चार्ज नहीं काट सकेगी।
मनमाने तरीके से नौकरी खत्म नहीं कर सकेगी एजेंसी
सरकार ने नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी नई व्यवस्था की है। आउटसोर्स एजेंसी किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से हटाने का फैसला नहीं कर सकेगी। सेवा समाप्ति से पहले सरकार को सूचना देनी होगी और मामले की जांच की व्यवस्था होगी।
भर्ती प्रक्रिया भी होगी ऑनलाइन और पारदर्शी
नई व्यवस्था में भर्ती प्रक्रिया को भी डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर है। सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकृत अभ्यर्थियों में से चयन और निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा कराने की व्यवस्था बताई गई है। साथ ही आरक्षण नियमों का पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
क्यों अहम है यह फैसला?
आउटसोर्स कर्मचारियों को अक्सर वेतन में देरी, सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इन कर्मचारियों को केवल काम उपलब्ध कराने के बजाय वेतन, स्वास्थ्य, मातृत्व, भविष्य निधि और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है।
योगी सरकार की नई आउटसोर्स व्यवस्था में कर्मचारियों के लिए बीमारी के दौरान 78 दिनों की सवैतनिक छुट्टी, महिला कर्मचारियों के लिए 180 दिन का मातृत्व अवकाश, ESI के तहत चिकित्सा सुविधा, EPF के जरिए पेंशन और समय पर वेतन जैसी सुविधाओं पर जोर दिया गया है। यदि इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए यह सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।



